शून्य से शिखर तक का सफर एसईसीएल में एक युग का अंत इंटक जे सी सी क्षेत्रीय अध्यक्ष डी. एल. गवालवंशी को नम आंखों से दी गई भावभीनी विदाई
कुड़ेकेला:-संघर्ष समर्पण और मजदूर हितों की बेबाक आवाज बने राष्ट्रीय खान मजदूर संघ के कद्दावर नेता एवं एसईसीएल जेसीसी क्षेत्रीय अध्यक्ष डी. एल. गवालवंशी के सेवानिवृत्त होने पर छाल उपक्षेत्र में विदाई समारोह का भावुक माहौल देखने को मिला। 21 अगस्त 1989 से शुरू हुआ उनका 35 से अधिक वर्षों का बेदाग और संघर्षशील सेवा सफर अंततः पूरा हुआ जहां सहकर्मियों और संगठन के साथियों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी।
कटकोना से छाल तक फोरमेन से मजदूर मसीहा बनने की दास्तान:-
गवालवंशी जी ने अपने करियर की शुरुआत 21 अगस्त 1989 को बैकुंठपुर क्षेत्र के कटकोना खदान में एक फोरमेन के रूप में की थी। इसके बाद सन 1995 में उनका स्थानांतरण रायगढ़ जिले के छाल उपक्षेत्र में हुआ। छाल पहुंचते ही उन्होंने जब खदानों में काम कर रहे मजदूरों की विषम परिस्थितियों और उनकी समस्याओं को देखा तो उनका दिल पसीज गया।
पॉलीटैक्निक की पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाले गवालवंशी ने यहीं से मजदूर संगठन की बागडोर अपने हाथों में ली। उन्होंने संगठन को शून्य से उठाकर नंबर वन के पायदान तक पहुंचाने में अपना जीवन खपा दिया। यूनिट अध्यक्ष वेलफेयर मेंबर से लेकर जेसीसी के क्षेत्रीय अध्यक्ष जैसे जिम्मेदार पदों पर रहते हुए उन्होंने ट्रेड यूनियन राजनीति को एक नई ऊंचाई दी।
कार्य को दें प्राथमिकता पर हक मांगने से न पीछे हटें गवालवंशी का संदेश
अपने विदाई भाषण में भावुक होते हुए गवालवंशी जी ने अपने जीवन के संस्मरण साझा किए और उपस्थित मजदूर भाइयों के नाम एक कड़ा संदेश दिया:
काम ही हमारी पहली पहचान है इसलिए खदान और उत्पादन के कार्य को हमेशा प्राथमिकता दें। लेकिन जब बात आपके जायज हक सुरक्षा और अधिकारों की आए तो कभी पीछे न हटें। अपनी हक की लड़ाई हमेशा एकजुट होकर और मजबूती से लड़ें।
मजदूर हितों के लिए सदैव याद रखा जाएगा कार्यकाल
सहकर्मियों और श्रमिक प्रतिनिधियों ने कहा कि डी. एल. गवालवंशी का कार्यकाल केवल पद संभालने का नहीं बल्कि धरातल पर उतरकर जमीनी स्तर के मजदूरों के अधिकार दिलाने का युग था। संगठन को मजबूत आधार देने और प्रबंधन के सामने श्रमिकों का पक्ष बेबाकी से रखने के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।

